Tuesday, February 7, 2012

माता-पिता करवाते हैं-जीवन भर का बलात्कार


जीवन भर का बलात्कार
बलात्कार का सबसे घिनौना रूप
मै आप सब को शारीरिक शोषण के बारे में बताना चाहता हूँ | वैसे तो शारीरिक शोषण से सब लोग परिचित है | शारीरिक शोषण के बारे में आप सब ने अच्छी तरह से सुने और देखें है | हमारा समाज भारतीय रीति-रिवाजों पर टिका हुआ है | भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ एवं महानतम संस्कृति है , परन्तु फिर भी इसमे बहुत सारी अमानवीय , कठोर और निर्मम बुराइयाँ है | इन बुराइयों को पहचानने की सख्त जरूरत है , नहीं तो दिन-प्रतिदिन मानवता और इंसानियत की हत्या होती रहेगी | शारीरिक शोषण के कई रूप हो सकते है परन्तु सबसे घिनौना रूप है बलात्कार | आप सब जानते है की बलात्कार की प्रक्रिया में दो पक्ष होते है |
१. बलात्कार करने वाला ( प्रायः पुरुष वर्ग )
२. जिसका बलात्कार होता है ( प्रायः स्त्री वर्ग )
सामान्य बलात्कार से आप सब बहुत अच्छी तरह से वाकिफ है | इस तरह के बलात्कार में बलात्कारी सिर्फ और सिर्फ केवल एक बार ही बलात्कार करता है | इसके बाद क्या होता है आप सब अच्छी तरह से जानते है जैसे की पंचायत , पोलिस , मेडिकल और कोर्ट के चक्कर | इसमे बलात्कारी को बिना जमानत के सख्त से सख्त सजा होती है , और कभी-कभी फांसी भी हो जाती है | ये सबसे परिचित और सामान्य बलात्कार है , परन्तु इसी बलात्कार का एक और घिनौना , कठोर और सबसे निर्मम रूप है जिसमे शारीरिक और मानसिक बलात्कार होता है , भावनावों का बलात्कार होता है | यही बलात्कार का सबसे घिनौना , कुरूप , निर्दयी और निर्मम रूप है | इस तरह के बलात्कार में तीन पक्ष होते है...
१. बलात्कार करने वाला ( प्रायः पुरुष वर्ग )
२. जिसका बलात्कार होता है ( प्रायः स्त्री वर्ग )
३. बलात्कार करवाने वाले ( प्रायः माता-पिता और आप यानि कि ये समाज )
बलात्कार के इस रूप को जानने से पहले आप को बलात्कार को जानना होगा |
बलात्कार क्या होता है ?
जब कोई पुरुष किसी स्त्री के साथ उसकी सहमति के बगैर जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाता है , तो ये बलात्कार कहलाता है |
इस परिभाषा में " सहमति के बगैर " शब्द का ही सबसे ज्यादा महत्त्व है |
बलात्कार कब होता है ?
जब शारीरिक सम्बन्ध सहमति के बगैर बनाया जाए |
बलात्कार कब नहीं होता है ?
जब स्त्री-पुरुष एक-दुसरे कि सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाते है , तो यह बलात्कार नहीं होता है |
जिस बलात्कार को आप सब जानते है , उसमे सिर्फ एक ही अपराधी होता है तथा एक निर्दोष होता है | लेकिन मै आप को एक ऐसे बलात्कार के बारे में बातें जा रहा हूँ जिसमे दो अपराधी है तथा एक निर्दोष | 
अपराधी कौन-कौन है ?
बलात्कारी और बलात्कार करवाने वाले यानि कि माता-पिता और ये समाज |
निर्दोष कौन हैं ?
जिसका बलात्कार होता है |
मै जहाँ तक समझता हूँ आप सब बलात्कार कि परिभाषा को अच्छी तरह से समझ गए होगें | बलात्कार कि परिभाषा को ध्यान में रखते हुए आप सब अब
आसानी से समझ सकते है कि ....जब माता-पिता बेटी कि शादी , बेटी कि इच्छा को जाने बगैर , अपने मन मर्जी से करते है | मतलब कि ये शादी बेटी कि इच्छा के खिलाफ है , तो इस स्थिति में माता-पिता खुद अपनी बेटी का बलात्कार करवाते है | इस बलात्कार में बलात्कारी को कोई सजा ना होकर , हमारा समाज उसकी इज्जत करता है | ये कहाँ का न्याय है कि एक बलात्कारी को सजा तो दूसरे की आव भगत कि जाती है | यही है बलात्कार का सबसे घिनौना और सबसे निर्मम रूप जहाँ पर झूठे इज्जत के लिए माता-पिता अपने बेटी का हर पल , हर दिन यानि कि पूरी उम्र बेटी का बलात्कार करवाते है और इस बलात्कार में बेटी कि सहायता के लिए कोई भी सामने नहीं आता है | यहाँ पर बिटिया रानी पूरी तरह से असहाय रहती है | यही है बलात्कार का सबसे घिनौना और निर्मम रूप | 
ये सदा - सदा मानवता के खिलाफ है | अपने मन मर्जी से बेटी कि शादी करके आप सब अपना बोझ हल्का करते है | इस तरह की शादी में आप सब बेटी कि सौदेबाजी करते है | आप ये नहीं सोचते है कि जिंदगी तो बेटी की है , जीना बेटी को है , तो हम बेटी के अधिकारों का अतिक्रमण क्यों करे | लेकिन फिर भी आप सब करते है | यह नहीं सोचते है कि सही क्या है , गलत क्या है | इस तरह के माता-पिता अपनी बेटी का बलात्कार करवाते है |
ऐसे माता-पिता और लोग समाज के लिए कलंक है |
रामायण , महाभारत और गीता पढ़ने से कुछ नहीं होता है | ये सब अमल करने के लिए है ना की दिखावा करने के लिए | जैसा की आप सब जानते है कि रावण ने माता सीता का सिर्फ हरण किया था | रावण ने माता सीता को छुआ तक नहीं था | भगवान् राम ने उस रावण को मृत्यु-दंड दिया था | आप तो खुद अपनी बेटी का बलात्कार करवाते है तो अब आप किस सजा के भागीदार है , आप खुद सोच सकते है | ऐसे माता-पिता और समाज के लोग जो अपनी बेटी का खुद दिन-प्रतिदिन बलात्कार करवाते है , वह तो रावण से भी गए गुजरे है | ऐसे लोगों को दिवाली जैसा पवित्र त्यौहार मनाने और रावण का पुतला जलने का कोई अधिकार नहीं है | यदि आप स्वाभिमानी पुरुष है , तो खुद को जला डालो या फिर अच्छे माता-पिता बनो | अपनी बेटी का खुद बलात्कार मत करवों | बेटी को उसका अधिकार दो | यही सच्ची दिवाली है , यही भगवान् राम की सच्ची पूजा है |
भगवान श्री कृष्ण ने रुकमणि का हरण करके रुकमणि के अधिकारों की रक्षा की थी, तो वही महाभारत में भगवान् श्री कृष्ण ने ही खुद अपनी बहन सुभद्रा का अपनी बुआ कुंती के पुत्र अर्जुन द्वारा हरण करवा कर सुभद्रा के अधिकारों को रक्षा की थी | 
इस तरह से भगवान् ने आप सब को मानवता का रास्ता दिखाया है | आप सब भगवत गीता और भगवान् श्री कृष्ण की पूजा करते है , परन्तु उनके कर्म प्रधान जीवन से कुछ नहीं सीखते है | मेरी समझ में ये नहीं आता है कि आप सब भगवान् की कैसी पूजा करते है , क्यों भगवान् की पूजा करते है | 
अतः आप सब भगवान के कर्मप्रधान जीवन पर अमल करो , अपने जीवन में उतारो | बेटी के अधिकारों का हनन मत करो | यही सब भगवान कि सच्ची पूजा है | लेकिन आप सब तो जन्मजात अंधे है| आप कब सुधरेगें ये तो सिर्फ भगवान् ही जानते है | आपके इस निर्मम अपराध कि क्या सजा होगी आप जानते होगें | ईश्वर आपको कभी माफ़ नहीं करेगा | आप अपनी बेटी के सबसे बड़े शत्रु है | ऐसे माता-पिता और समाज के लोग सबसे बड़े कुकर्मी और अपराधी है , जो मानवता को दरकिनार करते है | 
मेरी आप सब से प्रार्थना है कि अपनी बेटी की जिंदगी बचा लो , यही धरती का और इस मानव जन्म का सबसे बड़ा पुण्य है |
बलात्कार करवाने वाले माता-पिता मत बनो | इस लिए आप अपने बेटी कि शादी वही करो जहाँ बेटी कि इच्छा हो ताकि वह खुश रह सके और आप को  गर्व से माता-पिता कह सके | बेटी को बेटी का अधिकार देकर आप खुश हो सकते है कि आपने अपनी बेटी को सच्चा सुख, न्यारा प्यार और खुशियों का संसार दिया है | 
यही मानव धर्म है | यही ईश्वर की सच्ची पूजा है | यही मोक्ष है | यही पुण्य है क्योकि आपकी बेटी माँ का रूप है और माँ सबसे सम्मानीय और सर्व शक्तिमान है |
बेटी को बेटी का अधिकार देना ही नारी जाति, बेटी , बहन और माँ की सच्ची पूजा और बंदना है | ऐसे करने मात्र से आप का मानव जीवन सफल हो जायेगा और आप महाविष्णु को प्राप्त करगें |
मै रजनी कान्त आप सब से यही आशा करता हूँ कि अब आप सब बलात्कार करवाने वाले माता-पिता नहीं बनेगें |-इंजीनियर रजनीकांत!

No comments:

Post a Comment