उत्पीड़न-औरतों का औरतों द्वारा, मर्दों के लिए
विभांशु दिव्याल
हां, मैं यह खतरा उठा रहा हूं, जान-बूझकर और सोच-समझकर उठा रहा हूं.
खतरा यानी चालू और चर्चित मुहावरों के विरुद्ध वह कहने का जिसे महिला दिवस के ढोल-नगाड़ों के बीच तो कम से कम कोई नहीं सुनना चाहेगा। हो सकता है कि अखबारी पन्नों और मीडियाई बहसों में पुरुष विरोधी आग उगलने वाले दुर्गा, चंडी और काली के महिलावादी मिनी कलि अवतार अपने खड्ग और खापर लेकर मेरे पीछे पड़ जाएं, मुझे महिला विरोधी करार दें, मुझे प्रतिगामी ठहरा दें, किसी कुंठा का शिकार बता दें या फिर मुझे वैचारिक तौर पर दिवालिया घोषित कर दें।